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सिद्धार्थनगर में होगा दूसरा काला नमक धान खरीदार-विक्रेता सम्मेलन

सिद्धार्थनगर में होगा दूसरा काला नमक धान खरीदार-विक्रेता सम्मेलन

8 और 9 नवंबर को जुटेंगे जिला मुख्यालय पर आयोजित सम्मेलन में देश भर के व्यापारी, निर्यातक और किसान

शासन ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजा पत्र, प्रमुख चावल व्यापारी और निर्यातकों की सहभागिता की अपेक्षा

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में 8 और 9 नवंबर 2025 को द्वितीय काला नमक धान खरीदार-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयासों से होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य किसानों, व्यापारियों, प्रोफेसरों और निर्यातकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित कर काला नमक धान के व्यापारिक अवसरों को बढ़ाना है। शासन के अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात संवर्धन विभाग आलोक कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर अपने-अपने प्रदेशों से प्रमुख चावल व्यापारी और निर्यातक भेजकर इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने की अपेक्षा की है।

सिद्धार्थनगर जिले का काला नमक धान, जिसे ‘बुद्ध धान’ के नाम से भी जाना जाता है, विश्व की सबसे पुरानी धान प्रजातियों में से एक है, जिसका इतिहास 600 ईसा पूर्व तक जाता है। ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि भगवान बुद्ध ने कपिलवस्तु से लौटते समय इस धान को जनता को प्रसाद उपहार स्वरूप में दिया था। अपनी विशिष्ट सुगंध और पोषण से भरपूर इस धान को जीआई टैग भी प्राप्त है। काला नमक धान प्राकृतिक रूप से आयरन, जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है, जो कुपोषण और एनीमिया से लड़ने में प्रभावी है। इसका निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। ग्लूटेन-फ्री होने के कारण यह आधुनिक स्वास्थ्य-जागरूक उपभोक्ताओं की पहली पसंद बन रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में सिद्धार्थनगर और आसपास के 11 जिलों में 6,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है, जिससे सीधे तौर पर 10,000 से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। साथ ही, ओडीओपी योजना (वन डिस्टिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना के तहत इस धान को नई पहचान मिली है और अब इससे कुकीज़, ब्रेड, पुलाव और अन्य आधुनिक व्यंजन भी बनाए जा रहे हैं। पिछले वर्ष आयोजित पहले सम्मेलन में देशभर से कृषि विशेषज्ञों, व्यापारियों और निर्यातकों ने भाग लिया था, जिससे किसानों को बाजार विस्तार और व्यापारिक साझेदारी के अवसर मिले थे। इस वर्ष का आयोजन और भी व्यापक और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने बताया कि शासन के अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात संवर्धन विभाग आलोक कुमार की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर अपने-अपने प्रदेशों से प्रमुख चावल व्यापारी और निर्यातक भेजकर इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने की अपेक्षा की गई है।

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