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मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनें वैज्ञानिक नवाचार : मुख्यमंत्री योगी

मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनें वैज्ञानिक नवाचार : मुख्यमंत्री योगी

बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में शनिवार को विज्ञान भारती के अधिवेशन का उद्घाटन करने के बाद विचार रखते सीएम योगी आदित्यनाथ

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय परंपराएं वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। अनुसंधान और नवाचार का उद्देश्य मानव कल्याण, आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय विकास होना चाहिए। वह शनिवार को बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने वैदिक सूत्रों के साथ अपने बचपन के अनुभवों और प्रशासक के तौर पर अपने निर्णयों में स्वदेशी विज्ञान एवं परंपराओं के मूल्यों को भी साझा किया।

बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र, आईआईटी बीएचयू और आईयूसीटीई की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय अधिवेशन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वंदे मातरम के सामूहिक गान से हुआ। मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में भारत की समृद्ध वैज्ञानिक एवं ज्ञान परम्परा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता सभ्यता में में अनुसंधान अ एवं नवाचार हमेशा से समाहित रहा है इसने भारत की समृद्धि और वैश्विक नेतृत्व में योगदान दिया है। उन्होंने देश की प्राचीन कृषि परंपराएं, स्वास्थ्य और भोजन से जुड़ी विधियों के वैज्ञानिक सिद्धांतों से मेल पर चर्चा की। कहा कि इन्होंने हमारे समाज को तो सशक्त बनाया ही, लोगों को भी नई चेतना और प्रेरणा प्रदान की है। इसका
उदाहरण हमने कोविड-19 महामारी के काल में भी देखा कि इम्यूनिटी मजबूत करने में कैसे भारतीय प्राचीन ज्ञान पद्धतियों ने आम लोगों की सहायता की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान चार से पांच सौ साल पुराना है जबकि भारतीय विज्ञान इससे कहीं पुराना और समृद्ध है। भारत की प्राचीन गौरवशाली परम्परा के अध्ययन में यह देखने को मिलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी। चार सौ साल पहले भी लगभग 24-25 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। मगर गुलामी काल और उसके बाद हम डेढ़ से दो प्रतिशत पर आ गए। उन्होंने कहा कि पहले हमारा किसान इनोवेटर था। कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था। हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं था, बल्कि देशों को जोड़ने की महत्वपूर्ण कड़ी था। अर्थव्यवस्था खेतीबारी से जुड़ी थी और हमारे उत्पाद दुनियाभर में जाते थे।

मुख्यमंत्री योगी ने कृषि, ओडीओपी और एमएसएमई को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। वैद्य जीवक को मिले गुरुमंत्र को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं हो सकता। युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और अनुसंधान क्षमता को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करें। आधुनिक विज्ञान को पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने के मुद्दे पर सतत विकास, प्राकृतिक कृषि, जमीनी स्तर के नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया। संस्मरण से बताई गंगाजल की दिव्यताः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्बोधन में अपने बचपन का एक संस्मरण भी साझा किया। बताया कि उनकी मां सभी भाई-बहनों को पौधे लगाने और उनकी रखवाली करने की प्रेरणा देती थीं। कई बार जब कुछ पौधे बढ़ते नहीं थे तो बच्चे मां को यह बात बताते। मां अंजुरी में गंगाजल लेकर पौधों पर छिड़कतीं और कहतीं कि अब सब सही हो जाएगी। इसके पांच-छह दिनों के भीतर ही पौधों में फूल आने लगते थे। इस संस्मरण से उन्होंने गंगाजल की दिव्यता बताते हुए गंगा को प्रदूषित करने वाली आदतों पर चिंता जताई।

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