स्वास्थ्य, संतुलन और आत्मोन्नति का मार्ग है हठयोग-सीएम योगी
गोरखपुर: भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर योग आज पूरी दुनिया को स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जा रहा है। योग की महान परंपरा में महायोगी गुरु गोरखनाथ का योगदान महत्वपूर्ण है। गोरक्षपीठ आज भी गुरु गोरखनाथ की योग साधना परंपरा का संवाहक व संरक्षक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जब दुनिया रोग, तनाव, अवसाद और अशांति से जूझ रही है, तब भारतीय योग परंपरा विशेष रूप से हठयोग मानवता के ज्योतिपुंज के रूप में प्रदीप्त है। हठयोग न केवल स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्रदान करता है बल्कि जीवन को सकारात्मक,संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाने का भी माध्यम है।
हठयोग, आध्यात्मिक और प्राणों की साधना के रूप में विशिष्ट स्थान रखता है। यह दिव्य योग विद्या भगवान आदिनाथ शिव से योगीराज मत्स्येंद्रनाथ और उनसे गुरु गोरखनाथ को मिली। गुरु गोरखनाथ ने मानवता के कल्याण के लिए इस ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाया। हठयोग साधना लोककल्याण, आत्मकल्याण और विश्वकल्याण का मार्ग खोलती है।
हठयोग में ‘ह’ सूर्य स्वर और ‘ठ’ चंद्र स्वर का प्रतीक है। सामान्यतया श्वास प्रश्वास की प्रक्रिया में दोनों स्वर एक साथ सक्रिय नहीं रहते। हठयोग साधना के जरिये सूर्य और चंद्र स्वरों में संतुलन स्थापित होता है। यही संतुलन शरीर की प्राण शक्ति को जागृत व सक्रिय करता है। यह साधना जीवन को सरल, सहज व प्रकृति के अनुकूल बनाते हुए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियों का विकास करती है।
हठयोग में शरीर की शुद्धि को महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अंतर्गत घटकर्म, आसन, मुद्राबंध और प्राणायाम जैसी क्रियाएं साधन हैं, जो शरीर व मन को संतुलित और सशक्त बनाती हैं। हठयोग का परम लक्ष्य कुंडलिनी जागरण, षटचक्र भेदन और मोक्ष की प्राप्ति है। यह साधना जीवात्मा को शिवत्व की अनुभूति कराते हुए उसे परम चेतना से एकाकार करने का मार्ग खोलती है।

