अवैध निर्माण पर भी एलडीए करेगा कसेगा शिकंजा, भवन मालिकों पर होगी कानूनी कार्रवाई
ध्वस्तीकरण, सीलिंग के बाद सीधे सीजेएम कोर्ट में चलेगा मुकदमा,बिजली, फायर, पुलिस व निगम की भी जवाबदार
लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। अलीगंज अग्नि कांड के दृष्टिगत राजधानी में अवैध निर्माण करने वालों के लिए अब मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने ऐसे भवन स्वामियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का फैसला किया है। अब केवल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।एलडीए के संयुक्त सचिव सुशील प्रताप सिंह के अनुसार यदि किसी भवन के खिलाफ सीलिंग या ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हो चुका है और इसके बावजूद मानकों का पालन नहीं किया जाता, तो संबंधित भवन स्वामी को अदालत का सामना करना पड़ेगा। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी को जमानत करानी होगी और न्यायालय की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। कोर्ट द्वारा अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों ने अपनी जान गंवा दी थी।
आदेशों की अवहेलना पर अवमानना का भी केस चलेगा।एलडीए अधिकारियों के मुताबिक यदि कोर्ट के आदेश या प्राधिकरण के निर्देशों के बाद भी भवन को मानकों के अनुरूप नहीं बनाया गया, तो इसकी रिपोर्ट दोबारा न्यायालय को भेजी जाएगी। इसके बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी शुरू हो सकती है। लगातार नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अधिक जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान रहेगा।
मामला निस्तारित होने पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।संयुक्त सचिव ने बताया कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में भवन स्वामी आंशिक कार्रवाई के बाद फिर से नियमों का उल्लंघन करने लगते हैं। ऐसे मामलों में अब कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसे नई तैयार कराई गई एसओपी में भी शामिल किया गया है। अवैध निर्माण पर निगरानी और जवाबदेही तय करने के लिए एलडीए नई डिजिटल व्यवस्था भी लागू करने जा रहा है। इसके तहत जैसे ही किसी भवन के खिलाफ नोटिस जारी होगी, उसकी सूचना स्वतः संबंधित विभागों तक पहुंच जाएगी।
बिजली, फायर, पुलिस व निगम भी जवाबदेह होंगे।नई प्रणाली के तहत बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग, नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस की प्रति ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इससे कोई भी विभाग यह तर्क नहीं दे सकेगा कि उसे संबंधित भवन की स्थिति की जानकारी नहीं थी। संयुक्त सचिव ने बताया कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से नोटिस जारी होने, उसकी प्राप्ति और आगे की कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे अवैध निर्माण के मामलों में विभागीय जिम्मेदारी तय करना आसान होगा और राजधानी में नियमों के विपरीत खड़ी होने वाली इमारतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। सोर्स विज्ञप्ति।

